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Showing posts from May, 2021

केरेक्टरलेस

 केरेक्टरलेस लड़कियाँ.... असल में  वो बेवक़ूफ़ लड़कियाँ होती हैं जो  भरोसा कर लेती हैं आसानी से उन प्रेमियों पर जिनकी आदत है छोड़ जाने की मन भर जाने के बाद

हमारे त्योहार

 हर त्योहार पर अपने देश को कोसा जाता है खुश मन से यहाँ कोई त्योहार क्यों नही मानता है नवरात्रि आयी तो लोगों को स्त्रियों की दुर्दशा याद आ जाती है,  Mothers day पर देश भर की माँ अनाथाश्रम पहुँच जाती हैं पूरा साल और रोजमर्रा में ये सम्मान कहाँ जाता है खुश मन से यहाँ कोई त्योहार क्यों नही मनाता है दीपावली पर बस दीये बनाते गरीब दिखते हैं बाल दिवस पर सारे बच्चे बदनसीब दिखते हैं सावन आये तो सबको चारो ओर सूखा नज़र आता है खुश मन से यहां कोई त्योहार क्यों नही मनाता है अपने आस पास जो हैं,  रोज उनकी परवाह लो, काफी है एक दिन रोकर ही क्या बदलाव आ जाएगा हँसी- खुशी से मनाओ तो क्या खराबी है आखिर कोई त्योहार साल भर में एक बार आता है खुश मन से यहाँ कोई त्योहार क्यों नही मनाता है #मानवी

ठिठोली

 कुछ ऐसा काम कर जाना चाहती हूँ दोस्तों से ज्यादा दुश्मन कमाना चाहती हूँ थक गई हूँ झूठी तारीफें सुनकर सबकी नफ़रतें बाहर लाना चाहती हूँ मेरे बाद कोई न कहना कि "इंसान अच्छी थी" #RIP की जगह 😂 रियेक्ट पाना चाहती हूँ आखिरी हिचकी पे सबकी हँसी छूट जाये कि मौत भी मैं #लाफ़्टराना चाहती हूँ 💁 जेंडर ही बदल जाते हैं, पीकर अद्धा-पउआ 💁 कोयल गाना #गाता है और किकियाती #रहती कउआ 😷 मैं तुम्हारी वो खराब आदत बनना चाहती हूँ जिसे तुम हर साल छोड़ने का संकल्प लो पर कभी छोड़ न पाओ 💁😀 उल्टा जमाना आएगा, कह गए दास कबीर रांझा आँसू बहायेगा, पी कर लुढ़केगी हीर💁 ग़ालिब ने यह कह कर तोड़ दी माला, गिनकर क्यों नाम लूँ उसका जो बेहिसाब देता है आशिको ने ये कहकर छोड़ दी गिनती गिनकर कैसे इश्क़ करूँ, जब माशूकायें वो बेहिसाब देता है 💁 सारे मजनूँ दार्शनिक हो गए, सारी लैला शादीशुदा मारे मारे फिर रहे हैं, इश्क़ मुहब्बत और वफ़ा 💁 हम शायरी में अपने दिल की भावनायें निकाल देते हैं वो आते हैं और उन भावनाओं का अचार डाल देते हैं ऑनलाइन होकर भी रिप्लाई नही करते है जाने किससे हिलगे हैं, तोहमत हमपे धरते हैं 💁😏 तेरी बातें सोच सोच कर...

दुआए

 कभी कभी बहुत दुखी होते हैं,,,, बहुत दुखी,,,, मतलब इतना कि ज़ोर ज़ोर से चीख कर रोयें, और जिसने इतना दुख दिया है उसे जी भर के कोसें और गालियाँ दें,,,, माना उस वक़्त खुद पर बस नहीं चलता,, ये सब खुद से ही होता है, लेकिन ज़रा रुक कर एक बार सोचिये तो सही,,, दुनिया में दुख बढ़ते जा रहे हैं, दुखी इंसान बढ़ते जा रहे हैं, हर कोई एक दूसरे से दुखी है, हर कोई एक दूसरे को कोस रहा है,,,, बद्दुआ दे रहा है,,,,  "बद्दुआएं यकीनन असर करती हैं,  खासतौर से टूटे दिल से निकली बद्दुआएं,," और जिस पर असर करती हैं, वो फिर दूसरे को नई बद्दुआ देता है, इसी तरह ये कुचक्र चला जा रहा है, लोग टूटते जा रहे हैं, कोई खुश दिखाई नही देता, ये कुचक्र जहां भी शुरू हो जाता है, आस पास के सारे लोग दुखी होना शुरू हो जाते हैं #भंवर है ये,, इससे हम ही खुद को निकाल सकते हैं,  बन जाइये #नीलकंठ,,, पी लीजिये #हलाहल,,,,  बहुत तकलीफ होगी, बहुत ज़्यादा,,,,,सह लीजिये, रो लीजिये, लेकिन किसी को बद्दुआ मत दीजिये, जिसने इतना दर्द दिया है कभी तो वो अपना रहा था, उसकी भी खुशी की कामना कीजिये ,,, धीरे धीरे ये कुचक्र टूटेगा, दुख को ...

हिस्से

 ये बेरुखी है या नफरत है,ये इश्क़ है या इबादत है कुछ तो है दरम्यां हमारे, यूँ ही नहीं तू मेरी आदत है ये बारिश भी मेरे साथ शोक मनाती है मेरी प्रेम कहानी कश्तियों सी डूब जाती है काँच के #चश्मे बेवफा ठहरे,  आँखों से फासला बना लेते हैं बारिशों में तो आँसुओं के #चश्में उफान पर होते हैं राधा तो देवी भई,  रचा के रास कृष्ण के संग  चरनदासी मीरा भई,  मोह सभी से करके भंग प्रियतम का प्यार पाके,  घरवालों का जहर भी खाके सखी री मैं #मीराधा हुई,  पीकर तानों/प्रेम की भंग ❤️ छूट गयी चूड़ी की खन-खन, खाली खाली हाथ हुए खो गयी पायल की छन-छन, सूने-सूने पाँव हुए आँखों से झरने फूटे, ज़िंदगी उतनी ही बंजर हुई उम्मीद के जितने फूल खिले थे, मन पर उतने ही घाव हुए लोग घूमने जाते हैं यात्रा के हिस्से लिखते हैं भाँति भाँति के लोग हैं मिलते लोगों के किस्से लिखते हैं मैं ज़िन्दगी के कूयेँ पर गमों के घिस्से लिखती हूँ मैं बंधी हुई देहरी के भीतर आवारा इक मन है, जिससे लिखती हूँ दुनिया की हर ठोकर पे #हौंसलो की जीत हो हँसते हँसते भर लूँ मैं आँखें कभी तो ऐसी ईद हो रोज़े खत्म हुए सबके मेरी आँखें रोज़े...

वापसी

 क्या वो वापिस आयेगा,,,, मैं गाऊँ जो नगमें याद में उसकी, क्या वो वापिस आयेगा या ओढ़ लूँ गहरी खामोशी, तो क्या वो वापिस आयेगा सोच उसे मैं खिलखिलाऊँ, क्या वो वापिस आयेगा या ज़ार ज़ार करके रो जाऊँ, तो क्या वो वापिस आयेगा दर-ब-दर उसे ढूँढने जाऊँ, क्या वो वापिस आयेगा या तन्हा कोने में छुप जाऊँ, तो क्या वो वापिस आयेगा रात भर चाँद को तकती जाऊँ, क्या वो वापिस आयेगा किसी रोज़ अगर मैं उठ न पाऊँ,,,,,, गहरी नींद सोती ही रह जाऊँ,,,,,,, तो क्या वो वापिस आयेगा #मानवी

मैं

 मैं,,,, क्या सच में मैं ही हूँ,,, कभी सोचा ही नहीं कि मुझमें कोई #मैं भी है जो भी मिला वो एहसान जता गया- "मैंने तुम्हारे लिए ये किया, मैंने तुम्हारे लिए वो किया" हर एक के #मैं का मान रखा- हाँ तुमने किया लेकिन मेरा #मैं,,,, न कभी मैंने दिखाया, न किसी ने देखना चाहा जो भी मिला वो अपनी काबिलियत समझा गया "मैं ये हूँ, मुझे वो आता है" हर एक के मैं का सम्मान किया- हाँ तुम हो लेकिन मेरा वजूद,,,, न कभी मैंने दिखाया, न किसी ने देखना चाहा क्या समझूँ खुद को अब बिना अहम की #मैं,,, बिना वजूद की #मैं #मैं_मानवी

परित्यक्ता

 औरतें,,,,, खुश होती हैं सिंगार करके वो नही करतीं सिंगार,,, अपने लिए वो सजती-सँवरती हैं,,,,,जब हो कोई,,,  चाहने वाला पति निहारने वाला प्रेमी तारीफें उड़ेलने वाली सखियाँ नज़र उतारने वाले रिश्ते इतराती थी कभी मैं भी ढेरों सिंगार करके चाहत, इनायत, तारीफें, दुलार,,जी भर बरसे आज रखे हैं सामने,,,मेहंदी, चूड़ी, बिंदी, काजल और,,,, खुश होने को बावरा मन भी तरसे लेकिन ,,,,नहीं है कोई,,,  मेहंदी रचे हाथों को प्यार से चूमने वाला जाते जाते पलट कर एक निगाह मन भर निहारने वाला कोई नहीं,,,,दो बोल तारीफों के देने वाला न ही,,,,लाड़ से नज़र उतारने वाला बस कानों में गूँजती, मन को भेदती कुछ दबी जुबान से निकली आवाज़ें हैं -क्या ज़रूरत है इसे सिंगार की,, -आखिर क्यूँ, किसके लिए इतना बन-संवर रही है -होगी ही ऐसी,,,तभी ये सब हुआ इसके साथ और दोनो हाथों से कानो में पड़ते सीसे को रोककर चुपचाप बैठ जाती हूँ,,, अपने बेरंग से कोने में,,,, न न,,, विधवा नहीं हूँ,,, सुहागन भी नहीं हूँ,,, #परित्यक्ता हूँ मैं #मैं_मानवी

कविता

 कविता,,,,, दुख का राग है खुश होती हूँ तो शब्दों का सूखा सा पड़ा रहता है या शायद खुशी के पलों को शब्दों में बाँधना नहीं आता मुझे जब तक दुखों का पहाड़ न टूटे कविता का निर्झर बहता ही नहीं आँखों से आँसुओ की जगह उँगलियों से शब्द बहाती हूँ तब ही मन की पीड़ा को हल्का कर पाती हूँ मेरे आस पास रहने वाले कभी मेरा दर्द समझ ही नहीं पाए आँसू जो नहीं दिखते मेरे किसी को मुझे पढ़ने वाले मुझे अच्छे से जानते हैं और भगवान,,,,,वो तो शायद मेरी कविताओं का दीवाना ही हो गया है बहुत दिनों तक कुछ न लिखूँ तो दुख दे देता है जिससे मेरा लिखना न रुके झरना बहता रहे दुख का राग गूँजता रहे अनवरत..... #मानवी

मुस्कुराती सुबह

 मेन रोड पर बने हुए आलीशान मकान रात दिन ट्रैफिक का धुआँ, कानफोड़ू शोर लोग ताज़ी हवा लेने सवेरे सवेरे पार्क के चक्कर काटते दिखाई देते हैं, हर कोई अपनी धुन में मस्त, कोई एक्सरसाइज करता हुआ, कोई जॉगिंग, कोई योगा तो कोई वॉकिंग..... अगर आप भी मेन रोड पर रहते हैं तो सवेरे सवेरे कभी शहर की #गलियों से होते हुए जाइये, एक अलग ही दुनिया बसी होती है वहाँ पर, वहाँ रौनक ही सुबह सुबह देखने को मिलेगी। हर दरवाज़ा खुला मिलेगा,  घरों की धुलाई होती हुई, महसूस होता है मानो यहाँ बारिश हुई है, भीगी सी गलियाँ, आगे चलकर गली का छोटा सा मन्दिर, सवेरे से ही घण्टियों की आवाज़ों से गूँजता, त्योहार पर हर आते-जाते को रोककर प्रेम से प्रसाद देना, एक तरफ गीले बालों को दुपट्टे से लपेटे कोई पेड़ की पूजा कर कथा कहती हुई, कोई सुनने वाला नही पास में, लेकिन उसकी तेज़ आवाज़ बताती है कि उसे भरोसा है कि भगवान सुनते हैं। बच्चे स्कूल जाने से पहले भागदौड़ मचाते हुए, एक तरफ गली के पुरुष पाजामे-बनियान में किसी बात पर ठठाकर हँसते हुए,,,, क्योंकि यही समय है उनका बतियाने का। फिर सब काम पर निकल जाते हैं दोपहर भर ये गलियाँ सुनसान रहती है...

श्राद्ध

 पितर पक्ष याद करते हैं उनको जो जा चुके हैं कभी वापिस न आने के लिए प्रार्थना करते हैं उनकी आत्मा की शांति के लिए बामन जिमाते हैं उनको तृप्त करने के लिए सुनो.... एक रिश्ता भी अपनी मौत मर चुका है टूट चुका है कभी न जुड़ने के लिए लेकिन परेशान कर रहा है अभी तक मुझे उसकी शांति के लिए क्या प्रार्थना करूँ उसको तृप्त करने के लिए क्या ज़िमाऊँ प्यार या नफरत प्यार से याद करूँ तो क्या मुझे परेशान करना छोड़ देगा नफरत भरी नज़र से देखूँ तो क्या वापिस नहीं आएगा छुड़ा लेना चाहती हूँ दामन उस मर चुके रिश्ते से कौन से तीरथ जाऊँ किससे तर्पण करवाऊँ कौन से कर्मकांड करवाऊँ कि इस पित्र पक्ष में इससे मुक्त हो पाऊँ #मानवी

Me too

 और आज भी कई स्त्रियाँ हैं जो नही बोलना चाहेंगी कि किसी ने उन्हें छुआ है कि किसी ने खिलौना समझ कर खेला है कि किसी ने शर्मिंदा किया है उन्हें ज़िन्दगी भर के लिए.... क्योंकि लाड़ की उम्मीद थी जिनसे... वही हाथ उसे छू रहे थे गलत जगह पर क्योंकि प्यार किया था जिसे जान से ज़्यादा... उसी ने छोड़ दिया हवस पूरी होने के बाद क्योंकि जिसके साथ जन्मों का बंधन बाँधा था... उसने रोज़ ही बलात्कार किया, उसकी भावनाओं का किसके खिलाफ आवाज़ उठायेंगी  किसका नाम सरेआम उछालेंगी जिनके हाथों में पली बढ़ीं,,,, उनका जिनसे बेहद प्रेम किया,,,,, उनका या जिसके साथ सात फेरे लिए,,,, उसका नहीं कर सकतीं ऐसा, क्योंकि अभी भी बंधी हुई हैं उन रिश्तों से क्योंकि अभी भी प्रेम है उन सबसे क्योंकि अभी भी वो #अपने हैं क्योंकि वो सिर्फ एक स्त्री हैं दुनिया भर का हलाहल पीकर प्यार बाँटने वाली एक देवी #MeToo 😢

चाहत

 सुनो,,, तुम किसी के साथ कितना भी फ़्लर्ट कर लो  और किसी भी हद्द तक कर लो,  लेकिन अपनी वाइफ होने का हक़ किसी को मत देना वो हक़ सिर्फ और सिर्फ मेरे लिए,,,, मैं तुम्हारे साथ अपनी ज़िंदगी जीना चाहती हूँ तुम्हारे साथ छोटी से छोटी खुशियां महसूस करना चाहती हूँ बरसात में सड़क के किनारे भीगते हुए,,,, गोलगप्पे खाना चाहती हूँ तुम्हारे साथ,  सर्दियों में शाम को कॉफ़ी पीते हुए टीवी देखना चाहती हूँ तुम्हारे साथ,  गर्मियों की रातों में आसमान के सितारे गिनना चाहती हूँ यूं ही तुम्हारे साथ टहलते हुए......  तुम काम से घर आओ और मुझे आवाज़ लगाओ- "अरे सुन रही हो, कहाँ गयीं",  और मैं तुम्हारी आँखों पर हाथ रखकर कहूं- ज़रा पहचानो मुझे 😀 😀  और तुम झट से मुझे बाहो में भर कर घुमा डालो,,,,,,  पूरा दिन काम से थक कर रात को तुम्हारी बाहो में सिमट जाना चाहती हूँ,  और हर सुबह जगाना चाहती हूँ तुम्हे, तुम्हारे माथे पर एक प्यारे से बोसे के साथ,  तुम्हारे साथ हर दुःख शेयर करना चाहती हूँ, तुम्हारा भी और मेरा भी,,, तुम्हारे तपते माथे पर रात भर ठन्डे पानी की पट्टी रखना चाहती हू...

हक़

 हाँ.... ऐसी ही हूँ मैं नहीं जता पाती खुद को नहीं बता पाती तुमको कुछ बुरा लगे तो भी, अच्छा लगे तो भी बुरा लगे तो इसलिए नहीं बोलती  कि कहीं तुम्हें भी कुछ बुरा न लग जाये अच्छा लगे तो इसलिए नहीं बोलती  कि कहीं मेरी ही नज़र न लग जाये चुप हो जाती हूँ बस और यकीन मानो... ये चुप्पी खुद को संभालने के लिए होती है उस बुरे और अच्छे से खुद को अलग करने के लिए होती है तुमसे दूर जाने के लिए तो बिल्कुल भी नहीं दूर तो कभी जा ही नहीं सकती न इस तरह से बाँध दिया है तुमने वादों में ....बिना किसी हक़ के..... अच्छा सुनो.... मिलना है तुमसे एक बस पहली और आखिरी बार तुम्हारे काँधे पर सर रखकर फफक कर रो सकूँ कि तुम पहले क्यूँ नही मिले मुझे इतना हक़ तो दोगे न... #मानवी

अकेलापन

 बहुत थक गई हूँ ये दिन भर की भागम भाग दिमाग की मशक्कतें दिल पर भी असर डालने लगी हैं कोई होता जो मेरी थकान को समझ पाता समझ पाता.... कि मुझे क्या चाहिए जिसके प्यार भरे स्पर्श से भूल जाती सारी चिंतायें एक हमसफ़र.... जिसके साथ निकल जाती ख्वाबों के सफर पर..... लेकिन.... जिनके पास हमसफ़र होते हैं क्या वो सब एक दूसरे को समझ पाते हैं एक दूसरे की जरूरतें एक दूसरे की आदतें शायद नही.... तो मेरा #अकेलापन ही क्या बुरा है कम से कम किसी से शिकायत तो नहीं कम से कम किसी से उम्मीद तो नहीं किसी के साथ का ख्वाब ही सही.... तकलीफ तो नहीं देता बजाय इसके कि...... कोई साथ होकर भी.. #साथ नही #मानवी

वजह

 -तुम बिल्कुल उसकी तरह बातें करती हो -तुम बहुत परेशान करती हो जैसे वो करती है -तुम मेरा कितना ख्याल रखती हो,,,बिल्कुल उसकी तरह -बहुत जल्दी मुँह फुला लेती हो, जैसे वो फुलाती है -तुम्हारी नाक की लौंग बिल्कुल उसकी तरह है -कितने ऑर्डर चलाती हो, बिल्कुल उसकी तरह लगती हो ...... मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ 💕 "---------अच्छा तो कोई ऐसी बात बताओ, जो उसके जैसी न हो मुझमें, लेकिन तुमको अच्छी लगती हो.... ...... ....... ......... ............ ............... -------------क्या हुआ !!!!" -सोच रहा हूँ

शादी का बंधन

 कभी देखा है अपने घर की स्त्रियों के चेहरों को ध्यान से काम में जुटी हुई, पसीना बहाती, पुरुषों की फटकार सुनती, बच्चो को लाड़ लड़ाती हर एक कि पसंद नापसंद का ध्यान रखने वाली क्या कभी किसी को ध्यान आया उनकी पसंद का उनको खाने में क्या पसंद है उनको भी घूमना फिरना पसंद है उनकी तबियत भी नासाज़ हो सकती है कभी उन्होंने भी किसी को मन ही मन पसंद किया होगा किसी के साथ जीवन बिताने के सपने देखे होंगे कुचल दिया होगा मन में ही उन अनगिनत इच्छाओं को माँ-पापा की इज़्ज़त की खातिर....😔 सोच कर देखिये, अपने आस पास देखकर सोचिए क्या हर बार परिवार के फैसले सही होते हैं क्या हमेशा अरेंज मैरिज वाली लड़कियाँ खुश रह पाती हैं ससुराल वालों के तानों के बोझ से दबी मायके वालों से ये भी नहीं कह पाती कि मुझे किस जगह लाकर बांध दिया है चुपचाप जहर का घूँट पीती पीती पल पल हज़ारों मौत मरती बिना किसी को कोई दोष दिए अपनी पसंद नापसंद के साथ ज़रा से प्यार की उम्मीद दिल में लिए चली जाती हैं एक दिन हमेशा के लिए आज किसी ने एक आवाज़ क्या उठायी सारे समाज की नज़रों में गिर गयी वो कन्यादान के बाद वैसे भी पिता का हक़ कहाँ मानते हो वो जी रही हो ...

यादें

 वो अपना हक जताना तो चाहते हैं हक़ दे नही सकते कोई,,,उनकी मजबूरी है वो मुझसे प्यार पाना तो चाहते हैं लेकिन खुद का प्यार जताना कहाँ ज़रूरी है सताने पे उनके जो मैं रूठ जाऊँ खुद ही जाकर मनाऊँ, उनकी मगरूरी है गर जीना सीख गई उनके बिना कभी फासले बन जायेंगे, ये जो अभी थोड़ी सी दूरी है दिन पे दिन खर्च ही होती जा रही थी हमने मरके ज़िन्दगी ज़रा सी बचा ली है बिना हैंडल के कप सी ज़िन्दगी... किस तरह हैंडल की जाए 🙅 कब से इंतज़ार में थकी हुई सी आँखें अब सुकून से गहरी नींद सोने का मन है पता है कि तुझे रोना नही पसंद, फिर भी एक बात तेरे गले लग कर, रोने का मन है 😢😢 आजकल कोई साथ होकर भी हर वक़्त याद आता है,,,, हाँ..... कि मैं #प्रेम में हूँ 💕 कोई ऐसा इंसान,,,  जो आपको आपसे मिलाये  जब आप खुद को भूल ही चुके हों,  तो वो इंसान आपके साथ ही,,,,, आपमें रह जाता है। मेरी आँखों में बारह महीने रहता है जो #सावन आया न अभी दुनिया के लिए... चैन की नींद सोता कौन है आजकल दिल खोलकर रोता कौन है खुद को तुझसे बांध लिया है #बड़ का लगाके फेरा जनम जनम तक छूटेगा न #साथ ये तेरा मेरा 💝 वो हरेक को उसके हिस्से का हक़ दे...

शरद पूर्णिमा

 शरद पूनम की रात... सोलह कलाओं से परिपूर्ण पृथ्वी के कण-कण को अपनी दूधिया रौशनी से नहलाने वाले चाँद कभी मेरे हृदय के आंगन में भी उतरो न इतना गहरा तिमिर लिए बैठी हूँ प्यार करने वाले ह्रदय के द्वार आते हैं प्यार और भरोसे का दिया जलाते हैं पर हार जाता है वो नन्हा दिया इस काले असुर से लड़ते लड़ते... बुझा दिया, बुझा मन... लेकर सब लौट जाते हैं अपनी किरणों से अमृत झरने वाले चाँद... मेरे अन्तस के गरल पर भी असर दिखाओ न जो गला रहा है मुझे ही धीरे धीरे जितनी प्यार की मिठास मुझे मिलती है मेरे ही अंदर का विष उसे खारा बना देता है जैसे सोलह कलाओं वाले तुम हो मुझे भी सोलह सिंगार करने हैं,,,, अपने प्रियतम के लिए 🙂 इस अंधकार और विष से मुक्ति दिला दो न वो आयें मेरे मन के द्वार मैं स्वागत करूँ उनका...विश्वास की चमक से और मन भर दूँ उनका...प्रेम के अमृत से सुनो,,, आज खीर के साथ अपना मन भी टांग आउंगी अलगनी पे अपनी अमृत वर्षा इस पर कर देना उनको सदा-सदा के लिए तुम मेरा करके ओ पूरे चाँद... आज मेरे इस व्रत को भी तुम,,#पूर्ण कर देना 🙏 #मानवी

फागुन

 माना कि बहुत दूर हूँ तुमसे हाथ मुझ तक नहीं पहुँचेंगे तेरे अपने रंग में तो कब से रंग दिए तुम्हीं तो हो मेरे मन के चितेरे लिखी थी उदासी जहाँ आंसुओ की सियाही से मन को मेरे... पहले तुमने कोरा किया वासंती सी मुस्कुराहट, आसमानी सी खुशियाँ गुलाबी सा रंग.... प्यार का भर दिया बेरंग सी मेरी जिंदगी में आकर  अनजानी ख्वाहिशों के नए रंग बिखेरे तुम्हीं तो हो मेरे मन के चितेरे बात मेरी मानो तो एक और काम करना तुम्हारी ही कलाकृति हूँ, इसपे अपना नाम धरना दुनिया पहचाने मुझे तेरे ही नाम से मेरी हर कमी चाहे, तेरे हाथों ही सँवरना दहक रही चौराहे पर होली की अग्नि मन मेरा ले रहा... तेरे संग फेरे तुम्हीं तो ही मेरे मन के चितेरे ❤️❤️ #मानवी

सीता

 दुनिया तो होती ही है लांछन लगाने के लिए अग्नि परीक्षा दे चुकी आपके आजमाने के लिए स्वर्ण प्रतिमा बनवाईये अब वामांग बिठाने के लिए राम से #श्रीराम बनिये, मर्यादा सिखाने के लिए त्याग रहे हैं दोनों खुद को, बैरी जमाने के लिए बैचैन ही रहेंगे सदा एक दूजे को पाने के लिए सालों बाद कभी आपसे मिलने तो ज़रूर आउंगी आप ही के सामने, धरती में समा जाने के लिए  राख भी न पायेंगे मेरी, तन पे लगाने के लिए कौन सा कोना ढूंढेंगे तब, अश्रु बहाने के लिए उम्र भर श्रापित रही मैं, रानी बस कहाने के लिए आपका साथ मिला मुझे,,,,बस पूजे जाने के लिए 🙏🙏🙏 #मानवी

नया साल

 2020 के मौसम सारे खुल चुके, 2021 अभी कोहरे में है आशायें भरी हैं सभी के मन में, निराशा फिर भी थोड़े में है जो थे कभी हर मर्ज की दवा, साथ छोड़ गए जो बन के हवा बूंद होकर अभी इन आँखों के कोरे में है निराशा फिर भी थोड़े में है नए साल में नए रिश्ते जुड़ेंगे, जिंदगी भर मिल के साथ चलेंगे उम्मीदें सजी लाल जोड़े में हैं.... निराशा फिर भी.....

सूनी रात

 चाँद उगा तो होगा तारे खिले तो होंगे सोचती है अक्सर,,, कोहरे में डूबी  सर्द रात सर्द होना तो वैसे भी नियति है  कभी चांदनी की शीतल किरणों से कभी ओस की टपकती बूंदों से कभी कोहरे से,,, तो कभी इंसानों के मुँह फेरकर सो जाने से दम ही तोड़ देती,,, अगर न होती फुटपाथ पर ठंडे अलाव के बगल में सोते गरीब की जिजिविषा विरह में डूबे प्रेमी की आहें दिन भर चकरघिन्नी बनी औरत के थकन और दर्द से निकले आँसू सरहद पर खड़े सैनिक की देशभक्ति का जज़्बा,,, कि इन सबके होने से  ये रात.... ज़िंदा सी लगती है 🙂
 खुरदुरी उँगलियाँ --------------------- कितने ही उत्सव मनाये कितने रिश्ते सहेजे समझदारी की धीमी आंच पर गृहस्थी की मिठाई पकाई उनकी खुरदुरी उँगलियों ने आज बेटी ने कहा - अब तो आपकी उँगलियाँ भी बिल्कुल नानी जैसी हो गई माँ #खुरदुरी

इन दिनों

 न खुश न उदास न तृप्ति न प्यास अज़ीब सी कुछ रिक्तता है इन दिनों ख्यालों का अंधड़ पलकों पे कंकड़  यादों के तिनके मन बीनता है इन दिनो न सर पे हाथ न टिकने को कांधा न माथा कोई चूमता है इन दिनों भागता जीवन ठहरा सा मन चकरघिन्नी सा बदन बस घूमता है इन दिनों सर्द ख्वाहिशें बैचैन रिहाइशें बाहों में बंधने को मन तरसता है इन दिनों प्रियतम स्वाति नैना चातक सुना है,,, प्रेम बरसता है इन दिनों ❤️

विवशता

 सबका दुख दर्द सुना दिलासा दिया.. हौंसला बंधाया.. अपनेपन की हर रस्म निभाई हमने - अरे ज़रा अभी बिजी हूँ - बस थोड़ी देर में कॉल करता/करती हूँ - तुम गलत हो, खुद को थोड़ा सुधारो दास्तां जब कभी अपनी सुनाई हमने... सिर पर बाम लगाया रुमाल बाँधा.. और सो गये... किसी हथेली के सुकून भरे दबाब की चाहत न जताई हमने बाथरूम को लॉक किया मुँह में दुपट्टा ठूंसा.. बेआवाज जी भर रो लिये... दुनिया को तो बस,,,,मुस्कुराहट ही दिखाई हमने 😊 हिकारतो के अनगिन वार झेलकर रोक टोक की बेड़ी पहनी खुले आसमान को तरसे अपनी ज़िन्दगी जब भी अपनी तरह चलाई हमने ज़माने की सुर लय ताल पर जी भर नाचे.. जश्न मनाया... खुद को खुद के मरने की, जमकर दी बधाई हमने

बरसी

 आज एक खास दिन था... सुबह जल्दी ही ऊबे अलसाये से मन को उठाया आने वाली खुशियों का लालच देकर अच्छे से तैयार किया देगची में कुछ अच्छे लम्हे चढाये काफी देर तक मंथन करके अच्छे से पका लिये उनकी खुशबू से ही जिस्म का घर महक गया कुछ उम्मीदों को जीमने के लिये बुलाया इसी बीच हवन की तैयारी भी कर ली सपनो को चुन चुन कर हवन कुंड में सजाया अश्रु घृत से अग्नि प्रज्ज्वलित की ख्वाहिशों की सारी सामग्री डाली और,,,,,, स्वाहा 🙏 उम्मीदों को जिमाकर विदा कर दिया सब कुछ अच्छे से निबट गया आज एक खास दिन था... आज एक रिश्ते की बरसी थी 😊

अपशकुन

 छींक,,,, मानी जाती है #अपशकुन किसी सफर पर जाते वक्त कल तक तो लगातार छींक आ रही थीं आज अचानक से थम गयीं सिर में जम कर बैठ गयी हैं सीने पर भी कुछ भारी-भारी सा है लोग कह रहे हैं फेफड़ों में कफ जम गया है मैं सोचती हूँ कि इतने वक़्त से जो पत्थर सीने पर रखे थी,,,उसका वजन ही बढ़ रहा है शायद !!! अब इस बेवजह के वजन को छोड़कर मेरे निकलने का वक़्त हो रहा है इसलिये छींक भी रुक गयी है जिससे मेरी अंतिम यात्रा में कोई अपशकुन न हो जाने कौन सा कमेंट अंतिम हो जाने कौन सी पोस्ट अंतिम हो जाने कौन सी साँस..... अंतिम हो 🙏🙏 #कोविड_अटैक

अनकहे ख्याल

 हाँ मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिखती आस पास हो रही  दुखद घटनाओं के बारे में,  शब्द ही नहीं मिलते... सैनिकों की शहादत पर  मन से उन्हें सैल्यूट करती हूँ उनके परिवार के दुख को समझकर अपनो के लिए चिंतित होती हूँ जो भी दूर हैं अपने परिवार से अपने काम के लिए... हाँ मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिखती किसी नेता-अभिनेता के निधन पर उनके किये अच्छे कामों को याद करती हूँ सोचती हूँ कि कभी तो मेरा कोई अपना इतने अच्छे काम कर पाए कि युगों युगों तक सबके मानस पटल पर उसका नाम गर्व के साथ अंकित रहे हाँ मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिखती... किसी के साथ जबरदस्ती करके ज़िंदा जला देने पर सोच कर भी दहशत हो जाती है शब्द ढूंढे से नहीं मिलते डर बैठ जाता है अपनी बच्चियों के लिए सब शाम तक सुरक्षित घर वापिस आ जायें सबकी बातें पढ़-सुनकर  बच्चियों को दुनियादारी समझाती हूँ हाँ मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिखती... किसी को हक़/न्याय दिलाने के लिए आवाज बुलंद नहीं करती... खुद के हक़ के लिए कभी आवाज़ नहीं उठा पायी,,, बस प्रार्थना कर लेती हूँ कभी किसी के साथ कुछ बुरा न हो हाँ,,,,,मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिखती क्योंकि अपना ...

क्षणिकाएं

 यूँ चुपचाप चले जायेंगे दुनिया से,  उनको खबर तक न होगी उनका एक आंसू भी ज़ाया हो हमारे लिए,  तो हमको तकलीफ होगी खुशी मिले जो मेरी बुराइयां करने से खुश हो लो, तुम्हें इज़ाज़त है समेट लूँगी ज़माने भर के ताने तेरी खुशी ही मेरी इबादत है कंक्रीट ही बना लिया खुद को मैंने लहज़े में अब बची कहाँ नज़ाकत है चिकने घड़े सी हो गयी हूँ अब इतनी नफरतो की हो सी गयी आदत है... प्रेम किया तो राधा हुई, भक्ति करि तो मीरा कृष्ण नाम की दौलत मिले, वो मन हो जाये फकीरा चाय के कप सी ज़िन्दगी,  धुएँ सा उड़ता अक्स तेरा वो एक घूंट मुहब्बत का,  न बिखरा न जज़्ब हुआ मेरे आँसुओं में तुम तुम्हारी बेरुखी में मैं... शायद दिल में जगह नहीं रही अब एक दूसरे के... 😔 एक पल का नहीं एक दिन का नहीं एक साल का भी नहीं, उम्र भर का वादा है कैसे टूट सकेगा बोलो भले साथ थोड़ा कम.. और बिछड़न थोड़ी ज़्यादा है 😊❤️ बरसात हो... और लिखने का मन न हो कभी। यूँ भी कट जाती है बेमन की ज़िन्दगी उम्मीदें सब पूरी करें, एक राजा के नाम की सन्यासी जीवन व्यतीत करें, सुध छोड़ आराम की । दृग में छिपाए अश्रु भरे, होठो पर स्मित मुस्कान धरे कौन ही पहचाने ...

परित्याग

 क्या समझा था मुझे  एक खिलौना,,, जब चाहा खेलोगे, जब चाहा फेंक दोगे एक कठपुलती जैसे चाहोगे नचाओगे, फिर कोने में डाल दोगे एक पत्थर जितनी चाहे चोट दोगे, तराशने के नाम पर काश कि कभी मुझे इंसान भी समझा होता जिसे दर्द होता है,,, चोट लगने पर गुस्सा आता है,,,, हर वक़्त गलत समझने पर आँसू आते हैं,,, छोड़ जाने पर थकान होती है, इशारों पर नाचते हुए कोफ्त होती है,,, बार बार अपना हक जताते हुए काश,,, कि तुमने कभी अपनी गलती समझी होती लेकिन पता है क्या,,,, ये खिलौने, कठपुतली, पत्थर सब टूट सकते हैं पर इंसान,,,,  उसे हुनर आता है उबर जाने का... हाँ, उबर गई हूँ मैं तुम्हारी उस दिखावे की दुनिया से तुम्हारे उस छलावे के रूप से बहुत अलग थे,,,, हमारे आदर्श, हमारे उसूल हमारी आदतें, हमारा प्रेम को समझने, करने का नज़रिया,,, और अब शायद... हमारे रास्ते भी अलग हैं

ककहरा

 वीरान सी हैं आँखे इनमें समंदर बहुत गहरा है, यादें मुस्कुराना चाहती हैं, उदासियों का पहरा है। लुटा कर सब कुछ ही होश में आता है इन्सां, यहाँ मुहब्बत बेअक्ली है और इश्क़ बहरा है। बढ़ा कर बेतकल्लुफियाँ, तकल्लुफ से पेश आये जो समझ लेना के उस चेहरे पर, एक और भी चेहरा है। बिना मार खाये तुम एक अक्षर न सीख पाओगे, #मानवी अभी तो बस ये, ज़िन्दगी का ककहरा है।

अवसाद

 खैरियत पूछो,,, कभी तो कैफियत पूछो खैरियत पूछने वाला कोई है ही नहीं या कभी किसी को अपना बनाया ही नहीं किसी को बनाया तो वो साथ निभा पाया ही नहीं हज़ारों बहाने लाखो दलीलें सैकड़ो परिस्थितियां जो अकेला है,,, वो अकेला ही है !! - कभी कुछ मन का हो गया...तो खुश - मन का नहीं हुआ.... तो उदास ये छोटी छोटी खुशियां-उदासियाँ ये खुराक हैं उसके अकेलेपन की लगातार खुशी मिल जाये, तब खोने से डरते हैं लगातार दुख मिल जाये, तब पागल से फिरते हैं ...लेकिन कभी किसी से कुछ बांट नहीं पाते ...क्योंकि किसी पर भरोसा ही नहीं कर पाते, ये अवसाद में डूबे...  अकेले खड़े ठूँठ से दरख़्त

स्त्री

 स्त्री बन सकती है,,, अहिल्या लक्ष्मीबाई स्त्री हो सकती है,,, मीरा सीता स्त्री कहला सकती है,,, लक्ष्मी सरस्वती ज्ञान, प्रेम, सम्पदा, बुद्धि, बहादुरी के लिए पूजी जाती स्त्री को ये #उपमान मिलते हैं... तानों के रूप में !!!
 एक बार साथ छोड़कर तुम्हारा लौट आना,,, जैसे बाढ़ के बाद बरसात, भूख मिटने के बाद रोटी मरने के बाद प्रशंसा,,, कि तुम कभी थे.... जरूरी ,,,  कि तुम अब कभी मत आना 🙂

जज़्बात

 कोई कहाँ खुद से खुद को पत्थर करता है काम ये ज़ज़्बातों का कारीगर करता है कभी एक कतरा भी, टिकता नहीं था पलकों पर समंदर कोई दिल में आज जज़्ब करता है पढ़ने वाले शायरी पढ़कर दाद देते हैं  कोई तो मिले, जो आँखों को पढा करता है बातें,,,,, बस ये बातें ही तो इश्क़ हैं वरना आजकल कौन किसी से मिला-जुला करता है हँसी के उजाले बाँटकर, उदासी ओढ़कर सो जाना अक्सर इंसां खुद का ही गुनाहगार हुआ करता है

जीवन

 झूठ, छल, प्रपंच और धोखा हमने कब किसी को रोका जितना मिला लेते चले गये हमने जमा किया भर भर खोखा सीने पे कोई तीर चलाये पीठ पे खंजर किसी ने भोंका अपने हों, चाहे हो पराये सबको ही तो मिला था मौका मुस्कुराये हर वार झेलकर दर्द को अपने कभी न भौंका आंसू पर सौ सौ पहरे कसे बत्तीसी को कभी न टोका उम्र की काल कोठरी पर आया कहाँ से हवा का झोंका जाने क्यों ऊपर वाले ने खुला छोड़ दिया एक झरोखा सूखी अधखुली पलकों पर पानी का क़तरा इक कौंधा  पथरीली सी जमीनों पर उग आया नन्हा सा पौधा अरमानों को जिसने रौंदा कोने में अब पड़ा है औंधा स्वाद आया है ज़िन्दगी में खट्टा, मीठा,चटपटा, सौंधा #मानवी