सूनी रात

 चाँद उगा तो होगा

तारे खिले तो होंगे

सोचती है अक्सर,,,

कोहरे में डूबी 

सर्द रात


सर्द होना तो वैसे भी नियति है 

कभी चांदनी की शीतल किरणों से

कभी ओस की टपकती बूंदों से

कभी कोहरे से,,,

तो कभी

इंसानों के मुँह फेरकर सो जाने से


दम ही तोड़ देती,,, अगर न होती

फुटपाथ पर ठंडे अलाव के बगल में सोते

गरीब की जिजिविषा

विरह में डूबे प्रेमी की आहें

दिन भर चकरघिन्नी बनी औरत के

थकन और दर्द से निकले आँसू

सरहद पर खड़े सैनिक की देशभक्ति का जज़्बा,,,


कि इन सबके होने से 

ये रात....

ज़िंदा सी लगती है 🙂

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