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Showing posts from September, 2018

राखी

सुना था कहीं पढा था कि किसी बहन ने भाई की कलाई पे अपनी साड़ी की चीर बाँधी थी और भाई ने कितने ही गज साड़ी से बहन की इज़्ज़त राखी थी शायद वही राखी थी,,,, अब बाज़ार से आती है महँगी सी राखी बाँधते हुए नकली हँसी वाली सेल्फी काफी गिफ्ट्स का लेन देन हो गया है रक्षा बंधन भी अब fb फेस्टिवल हो गया है सोशल मीडिया पर ढेरों भाई बहने बनाते हैं वॉल पर राखी की फोटो लगाकर, 50 लोगों को टैगीयाते हैं संस्कार का नाम अब स्वैग हो गया है रक्षा बंधन भी अब fb फेस्टिवल हो गया है "राखी बाँध दूँगी" अब नई धमकी है "भाई" बोलकर लड़की आशिको से बचती है ब्लॉक से ज़्यादा कारगर अस्त्र हो गया है रक्षा बंधन भी अब fb फेस्टिवल हो गया है अपने हाथों से राखी बनाना/खरीदना पुरानी बात हुई ऑनलाइन राखी स्पेशल ऑफर्स की बरसात हुई भाई बहन का रिश्ता अब डिजिटल हो गया है रक्षा बंधन भी अब fb फेस्टिवल हो गया है ससुराल में खटती बहन, नौकरी पे गया भाई जब एक दूसरे से मिल नहीं पाते हैं एक दूसरे को ऑनलाइन देखकर ही आँखों में आँसू भरके मुस्कुराते हैं दूर रहकर भी पास होने का जरिया हो गया है रक्षा बंधन भी अब...

2 अक्टूबर

किसका जन्मदिन मनायें आज याद करें अब किसके काज उसूल और आदर्श तो छोड़ो आँखों में बची नही है लाज स्वार्थ साधते वोटों में हैं, गाँधी आज सिर्फ नोटों में हैं सादा जीवन को समझे भाग्य नारा था जिनका अहिंसा सत्य जीवन जिनका लड़ लड़ बीता जीवनोपरांत बन गए हास्य बेशर्म हँसी की महफिलों में हैं, गाँधी आज सिर्फ चुटकुलों में हैं उनको फ्रीडम फाइटर बताते उनकी जीवनी याद कराते जो बनते अहिंसा के पुजारी धर्म के नाम पर लड़ते लड़ाते समाधि पर चढ़े गुलाबो में हैं, गाँधी आज सिर्फ किताबो में हैं राजनीति करो या वोट बनाओ चुटकुले रचो या किताबो में सजाओ पूज कर बस एक दिन उनको रोज चाहे कितना बरगलाओ आज भी वो महात्मा हैं, गाँधी भारत की आत्मा हैं -विभा

नवरात्रि

नवरात्रि का उत्सव सिर्फ उत्सव नहीं, ये है ज़रूरत समाज में नई शक्ति का संचार हो तभी सफल ये नवरात्रि का त्योहार हो शिक्षा पे सबका ज़ोर हो साक्षरता चहुँ ओर हो ज्ञान के बूढ़े वृक्ष हों और विज्ञान की नई बौर हो ज्ञान की देवी सरस्वती, हर नगर हर द्वार हो तभी असल में सफल ये नवरात्रि का त्योहार हो आक्रमणकारी दुश्मनों से अपने देश की रक्षा हो घर में घूमते शैतानों से लड़कियों की सुरक्षा हो शक्ति की देवी काली, घर में हो सीमा पार हो तभी असल में सफल ये नवरात्रि का त्योहार हो आय बढ़े, संसाधन बढें हरे भरे वन उपवन बढें रोजगार के अवसर हों विकास हो, निर्माण बढें धन की देवी लक्ष्मी का, हर राह पर विस्तार हो तभी असल में सफल ये नवरात्रि का त्योहार हो -विभा

कविता

जीने के लिए सोचा ही नहीं,,,दर्द संभालने होंगे मुस्कुराये तो मुस्कुराने के,,,,क़र्ज़ उतारने होंगे मुस्कुराऊं कभी तो लगता है जैसे होंठों पे क़र्ज़ रखा है कविता,,,,, दुख का राग है खुश होती हूँ तो शब्दों का सूखा सा पड़ा रहता है या शायद खुशी के पलों को शब्दों में बाँधना नहीं आता मुझे जब तक दुखों का पहाड़ न टूटे कविता का निर्झर बहता ही नहीं आँखों से आँसुओ की जगह उँगलियों से शब्द बहाती हूँ तभी मन की पीड़ा को हल्का कर पाती हूँ शायद इसीलिए मेरे आस पास रहने वाले कभी मेरा दर्द समझ ही नहीं पाए आँसू जो नहीं दिखते मेरे किसी को मुझे पढ़ने वाले मुझे अच्छे से जानते हैं और भगवान,,,,,वो तो शायद मेरी कविताओं का दीवाना ही हो गया है बहुत दिनों तक कुछ न लिखूँ तो दुख दे देता है जिससे मेरा लिखना न रुके झरना बहता रहे दुख का राग गूँजता रहे -वििभा

कान्हा तेरे कितने रूप

मेरे घर के मंदिर में छोटी सी मूरत बाहर तुझको ढूढूँ, क्या है ज़रूरत भक्ति तेरी मन ही मन गूँज लेती हूँ मूरत को कान्हा मान पूज लेती हूँ ---------------~ आँखों की चितवन में प्यारी सी सूरत साथ हो न हो मेरे, क्या है ज़रूरत राधा सी प्रेयसी, मीरा सी जोगन बन, घूम लेती हूँ प्रियतम को कान्हा मान, उसे प्रेम कर लेती हूँ --------------~ मेरे मन की बगिया में नन्ही सी कोंपल किलकारियों से जिसकी भरा मेरा आँचल नन्हे कदमो पे उसके, आसमाँ पसार देती हूँ बेटे को कान्हा मान, उसे दुलार देती हूँ ---------------~ मेरे घर के आँगन में, निरीह सी काया जीवन में जिसका ढलता वक़्त है आया सहारा देकर थोड़ा उसे, ढेर आशीर्वाद लेती हूँ बुजुर्गो को कान्हा मान, उनकी सेवा कर लेती हूँ ----------------~ पूजूँ तुझे, तुझे प्यार करूँ, सेवा करूँ तुझे दुलार करूँ जितने रूप तू धर ले कान्हा, हर रूप में तेरा सिंगार करूँ मंदिर तीरथ काहे जाऊँ, हर जीव में तेरा दर्शन हो बस हाथ पकड़ लेना मेरा, जब भव सागर को पार करूँ -विभा