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केरेक्टरलेस

 केरेक्टरलेस लड़कियाँ.... असल में  वो बेवक़ूफ़ लड़कियाँ होती हैं जो  भरोसा कर लेती हैं आसानी से उन प्रेमियों पर जिनकी आदत है छोड़ जाने की मन भर जाने के बाद

हमारे त्योहार

 हर त्योहार पर अपने देश को कोसा जाता है खुश मन से यहाँ कोई त्योहार क्यों नही मानता है नवरात्रि आयी तो लोगों को स्त्रियों की दुर्दशा याद आ जाती है,  Mothers day पर देश भर की माँ अनाथाश्रम पहुँच जाती हैं पूरा साल और रोजमर्रा में ये सम्मान कहाँ जाता है खुश मन से यहाँ कोई त्योहार क्यों नही मनाता है दीपावली पर बस दीये बनाते गरीब दिखते हैं बाल दिवस पर सारे बच्चे बदनसीब दिखते हैं सावन आये तो सबको चारो ओर सूखा नज़र आता है खुश मन से यहां कोई त्योहार क्यों नही मनाता है अपने आस पास जो हैं,  रोज उनकी परवाह लो, काफी है एक दिन रोकर ही क्या बदलाव आ जाएगा हँसी- खुशी से मनाओ तो क्या खराबी है आखिर कोई त्योहार साल भर में एक बार आता है खुश मन से यहाँ कोई त्योहार क्यों नही मनाता है #मानवी

ठिठोली

 कुछ ऐसा काम कर जाना चाहती हूँ दोस्तों से ज्यादा दुश्मन कमाना चाहती हूँ थक गई हूँ झूठी तारीफें सुनकर सबकी नफ़रतें बाहर लाना चाहती हूँ मेरे बाद कोई न कहना कि "इंसान अच्छी थी" #RIP की जगह 😂 रियेक्ट पाना चाहती हूँ आखिरी हिचकी पे सबकी हँसी छूट जाये कि मौत भी मैं #लाफ़्टराना चाहती हूँ 💁 जेंडर ही बदल जाते हैं, पीकर अद्धा-पउआ 💁 कोयल गाना #गाता है और किकियाती #रहती कउआ 😷 मैं तुम्हारी वो खराब आदत बनना चाहती हूँ जिसे तुम हर साल छोड़ने का संकल्प लो पर कभी छोड़ न पाओ 💁😀 उल्टा जमाना आएगा, कह गए दास कबीर रांझा आँसू बहायेगा, पी कर लुढ़केगी हीर💁 ग़ालिब ने यह कह कर तोड़ दी माला, गिनकर क्यों नाम लूँ उसका जो बेहिसाब देता है आशिको ने ये कहकर छोड़ दी गिनती गिनकर कैसे इश्क़ करूँ, जब माशूकायें वो बेहिसाब देता है 💁 सारे मजनूँ दार्शनिक हो गए, सारी लैला शादीशुदा मारे मारे फिर रहे हैं, इश्क़ मुहब्बत और वफ़ा 💁 हम शायरी में अपने दिल की भावनायें निकाल देते हैं वो आते हैं और उन भावनाओं का अचार डाल देते हैं ऑनलाइन होकर भी रिप्लाई नही करते है जाने किससे हिलगे हैं, तोहमत हमपे धरते हैं 💁😏 तेरी बातें सोच सोच कर...

दुआए

 कभी कभी बहुत दुखी होते हैं,,,, बहुत दुखी,,,, मतलब इतना कि ज़ोर ज़ोर से चीख कर रोयें, और जिसने इतना दुख दिया है उसे जी भर के कोसें और गालियाँ दें,,,, माना उस वक़्त खुद पर बस नहीं चलता,, ये सब खुद से ही होता है, लेकिन ज़रा रुक कर एक बार सोचिये तो सही,,, दुनिया में दुख बढ़ते जा रहे हैं, दुखी इंसान बढ़ते जा रहे हैं, हर कोई एक दूसरे से दुखी है, हर कोई एक दूसरे को कोस रहा है,,,, बद्दुआ दे रहा है,,,,  "बद्दुआएं यकीनन असर करती हैं,  खासतौर से टूटे दिल से निकली बद्दुआएं,," और जिस पर असर करती हैं, वो फिर दूसरे को नई बद्दुआ देता है, इसी तरह ये कुचक्र चला जा रहा है, लोग टूटते जा रहे हैं, कोई खुश दिखाई नही देता, ये कुचक्र जहां भी शुरू हो जाता है, आस पास के सारे लोग दुखी होना शुरू हो जाते हैं #भंवर है ये,, इससे हम ही खुद को निकाल सकते हैं,  बन जाइये #नीलकंठ,,, पी लीजिये #हलाहल,,,,  बहुत तकलीफ होगी, बहुत ज़्यादा,,,,,सह लीजिये, रो लीजिये, लेकिन किसी को बद्दुआ मत दीजिये, जिसने इतना दर्द दिया है कभी तो वो अपना रहा था, उसकी भी खुशी की कामना कीजिये ,,, धीरे धीरे ये कुचक्र टूटेगा, दुख को ...

हिस्से

 ये बेरुखी है या नफरत है,ये इश्क़ है या इबादत है कुछ तो है दरम्यां हमारे, यूँ ही नहीं तू मेरी आदत है ये बारिश भी मेरे साथ शोक मनाती है मेरी प्रेम कहानी कश्तियों सी डूब जाती है काँच के #चश्मे बेवफा ठहरे,  आँखों से फासला बना लेते हैं बारिशों में तो आँसुओं के #चश्में उफान पर होते हैं राधा तो देवी भई,  रचा के रास कृष्ण के संग  चरनदासी मीरा भई,  मोह सभी से करके भंग प्रियतम का प्यार पाके,  घरवालों का जहर भी खाके सखी री मैं #मीराधा हुई,  पीकर तानों/प्रेम की भंग ❤️ छूट गयी चूड़ी की खन-खन, खाली खाली हाथ हुए खो गयी पायल की छन-छन, सूने-सूने पाँव हुए आँखों से झरने फूटे, ज़िंदगी उतनी ही बंजर हुई उम्मीद के जितने फूल खिले थे, मन पर उतने ही घाव हुए लोग घूमने जाते हैं यात्रा के हिस्से लिखते हैं भाँति भाँति के लोग हैं मिलते लोगों के किस्से लिखते हैं मैं ज़िन्दगी के कूयेँ पर गमों के घिस्से लिखती हूँ मैं बंधी हुई देहरी के भीतर आवारा इक मन है, जिससे लिखती हूँ दुनिया की हर ठोकर पे #हौंसलो की जीत हो हँसते हँसते भर लूँ मैं आँखें कभी तो ऐसी ईद हो रोज़े खत्म हुए सबके मेरी आँखें रोज़े...

वापसी

 क्या वो वापिस आयेगा,,,, मैं गाऊँ जो नगमें याद में उसकी, क्या वो वापिस आयेगा या ओढ़ लूँ गहरी खामोशी, तो क्या वो वापिस आयेगा सोच उसे मैं खिलखिलाऊँ, क्या वो वापिस आयेगा या ज़ार ज़ार करके रो जाऊँ, तो क्या वो वापिस आयेगा दर-ब-दर उसे ढूँढने जाऊँ, क्या वो वापिस आयेगा या तन्हा कोने में छुप जाऊँ, तो क्या वो वापिस आयेगा रात भर चाँद को तकती जाऊँ, क्या वो वापिस आयेगा किसी रोज़ अगर मैं उठ न पाऊँ,,,,,, गहरी नींद सोती ही रह जाऊँ,,,,,,, तो क्या वो वापिस आयेगा #मानवी

मैं

 मैं,,,, क्या सच में मैं ही हूँ,,, कभी सोचा ही नहीं कि मुझमें कोई #मैं भी है जो भी मिला वो एहसान जता गया- "मैंने तुम्हारे लिए ये किया, मैंने तुम्हारे लिए वो किया" हर एक के #मैं का मान रखा- हाँ तुमने किया लेकिन मेरा #मैं,,,, न कभी मैंने दिखाया, न किसी ने देखना चाहा जो भी मिला वो अपनी काबिलियत समझा गया "मैं ये हूँ, मुझे वो आता है" हर एक के मैं का सम्मान किया- हाँ तुम हो लेकिन मेरा वजूद,,,, न कभी मैंने दिखाया, न किसी ने देखना चाहा क्या समझूँ खुद को अब बिना अहम की #मैं,,, बिना वजूद की #मैं #मैं_मानवी