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तर्पण

पितर पक्ष याद करते हैं उनको जो जा चुके हैं कभी वापिस न आने के लिए प्रार्थना करते हैं उनकी आत्मा की शांति के लिए बामन जिमाते हैं उनको तृप्त करने के लिए सुनो.... एक रिश्ता भी अपनी मौत मर चुका है टूट चुका है कभी न जुड़ने के लिए लेकिन परेशान कर रहा है अभी तक मुझे उसकी शांति के लिए क्या प्रार्थना करूँ उसको तृप्त करने के लिए क्या ज़िमाऊँ प्यार या नफरत प्यार से याद करूँ तो क्या मुझे परेशान करना छोड़ देगा नफरत भरी नज़र से देखूँ तो क्या वापिस नहीं आएगा छुड़ा लेना चाहती हूँ दामन उस मर चुके रिश्ते से कौन से तीरथ जाऊँ किससे तर्पण करवाऊँ कौन से कर्मकांड करवाऊँ कि इस पित्र पक्ष में इससे मुक्त हो पाऊँ