हमारे त्योहार

 हर त्योहार पर अपने देश को कोसा जाता है

खुश मन से यहाँ कोई त्योहार क्यों नही मानता है


नवरात्रि आयी तो लोगों को स्त्रियों की दुर्दशा याद आ जाती है, 

Mothers day पर देश भर की माँ अनाथाश्रम पहुँच जाती हैं

पूरा साल और रोजमर्रा में ये सम्मान कहाँ जाता है

खुश मन से यहाँ कोई त्योहार क्यों नही मनाता है


दीपावली पर बस दीये बनाते गरीब दिखते हैं

बाल दिवस पर सारे बच्चे बदनसीब दिखते हैं

सावन आये तो सबको चारो ओर सूखा नज़र आता है

खुश मन से यहां कोई त्योहार क्यों नही मनाता है


अपने आस पास जो हैं, 

रोज उनकी परवाह लो, काफी है

एक दिन रोकर ही क्या बदलाव आ जाएगा

हँसी- खुशी से मनाओ तो क्या खराबी है

आखिर कोई त्योहार साल भर में एक बार आता है

खुश मन से यहाँ कोई त्योहार क्यों नही मनाता है


#मानवी

Comments

Popular posts from this blog

सावन की खूबसूरती

2 अक्टूबर