2 अक्टूबर

किसका जन्मदिन मनायें आज
याद करें अब किसके काज
उसूल और आदर्श तो छोड़ो
आँखों में बची नही है लाज
स्वार्थ साधते वोटों में हैं, गाँधी आज सिर्फ नोटों में हैं

सादा जीवन को समझे भाग्य
नारा था जिनका अहिंसा सत्य
जीवन जिनका लड़ लड़ बीता
जीवनोपरांत बन गए हास्य
बेशर्म हँसी की महफिलों में हैं, गाँधी आज सिर्फ चुटकुलों में हैं

उनको फ्रीडम फाइटर बताते
उनकी जीवनी याद कराते
जो बनते अहिंसा के पुजारी
धर्म के नाम पर लड़ते लड़ाते
समाधि पर चढ़े गुलाबो में हैं, गाँधी आज सिर्फ किताबो में हैं

राजनीति करो या वोट बनाओ
चुटकुले रचो या किताबो में सजाओ
पूज कर बस एक दिन उनको
रोज चाहे कितना बरगलाओ
आज भी वो महात्मा हैं, गाँधी भारत की आत्मा हैं
-विभा

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