दुआए
कभी कभी बहुत दुखी होते हैं,,,, बहुत दुखी,,,, मतलब इतना कि ज़ोर ज़ोर से चीख कर रोयें, और जिसने इतना दुख दिया है उसे जी भर के कोसें और गालियाँ दें,,,,
माना उस वक़्त खुद पर बस नहीं चलता,, ये सब खुद से ही होता है, लेकिन ज़रा रुक कर एक बार सोचिये तो सही,,,
दुनिया में दुख बढ़ते जा रहे हैं, दुखी इंसान बढ़ते जा रहे हैं, हर कोई एक दूसरे से दुखी है, हर कोई एक दूसरे को कोस रहा है,,,, बद्दुआ दे रहा है,,,,
"बद्दुआएं यकीनन असर करती हैं,
खासतौर से टूटे दिल से निकली बद्दुआएं,,"
और जिस पर असर करती हैं, वो फिर दूसरे को नई बद्दुआ देता है, इसी तरह ये कुचक्र चला जा रहा है, लोग टूटते जा रहे हैं, कोई खुश दिखाई नही देता, ये कुचक्र जहां भी शुरू हो जाता है, आस पास के सारे लोग दुखी होना शुरू हो जाते हैं
#भंवर है ये,,
इससे हम ही खुद को निकाल सकते हैं,
बन जाइये #नीलकंठ,,, पी लीजिये #हलाहल,,,,
बहुत तकलीफ होगी, बहुत ज़्यादा,,,,,सह लीजिये, रो लीजिये, लेकिन किसी को बद्दुआ मत दीजिये, जिसने इतना दर्द दिया है कभी तो वो अपना रहा था, उसकी भी खुशी की कामना कीजिये ,,,
धीरे धीरे ये कुचक्र टूटेगा, दुख को हारना होगा, सब खुश होंगे,,, बस थोड़ा सा,,,, थोड़ा सा सहने की आदत,,, बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है
खुशियों की बारिश में भीगोगे तुम भी
कभी दुख दूसरे का जानकर देखो तो
याद रखते हो जिन्हें सिर्फ बद्दुआओं में
कभी दुआयें उनके लिए माँगकर देखो तो
#माता_मानवी ✋✋
Comments
Post a Comment