हिस्से

 ये बेरुखी है या नफरत है,ये इश्क़ है या इबादत है

कुछ तो है दरम्यां हमारे, यूँ ही नहीं तू मेरी आदत है


ये बारिश भी मेरे साथ शोक मनाती है

मेरी प्रेम कहानी कश्तियों सी डूब जाती है


काँच के #चश्मे बेवफा ठहरे, 

आँखों से फासला बना लेते हैं

बारिशों में तो आँसुओं के #चश्में उफान पर होते हैं


राधा तो देवी भई, 

रचा के रास कृष्ण के संग 

चरनदासी मीरा भई, 

मोह सभी से करके भंग

प्रियतम का प्यार पाके, 

घरवालों का जहर भी खाके

सखी री मैं #मीराधा हुई, 

पीकर तानों/प्रेम की भंग ❤️


छूट गयी चूड़ी की खन-खन, खाली खाली हाथ हुए

खो गयी पायल की छन-छन, सूने-सूने पाँव हुए

आँखों से झरने फूटे, ज़िंदगी उतनी ही बंजर हुई

उम्मीद के जितने फूल खिले थे, मन पर उतने ही घाव हुए


लोग घूमने जाते हैं

यात्रा के हिस्से लिखते हैं

भाँति भाँति के लोग हैं मिलते

लोगों के किस्से लिखते हैं

मैं ज़िन्दगी के कूयेँ पर

गमों के घिस्से लिखती हूँ

मैं बंधी हुई देहरी के भीतर

आवारा इक मन है, जिससे लिखती हूँ


दुनिया की हर ठोकर पे #हौंसलो की जीत हो

हँसते हँसते भर लूँ मैं आँखें कभी तो ऐसी ईद हो


रोज़े खत्म हुए सबके मेरी आँखें रोज़ेदार हुईं

चाँद रात हुई सबकी ये महबूब की तलबगार हुईं

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