बरसी
आज एक खास दिन था...
सुबह जल्दी ही ऊबे अलसाये से मन को उठाया
आने वाली खुशियों का लालच देकर अच्छे से तैयार किया
देगची में कुछ अच्छे लम्हे चढाये
काफी देर तक मंथन करके अच्छे से पका लिये
उनकी खुशबू से ही जिस्म का घर महक गया
कुछ उम्मीदों को जीमने के लिये बुलाया
इसी बीच हवन की तैयारी भी कर ली
सपनो को चुन चुन कर हवन कुंड में सजाया
अश्रु घृत से अग्नि प्रज्ज्वलित की
ख्वाहिशों की सारी सामग्री डाली
और,,,,,, स्वाहा 🙏
उम्मीदों को जिमाकर विदा कर दिया
सब कुछ अच्छे से निबट गया
आज एक खास दिन था...
आज एक रिश्ते की बरसी थी 😊
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