शरद पूर्णिमा

 शरद पूनम की रात...


सोलह कलाओं से परिपूर्ण

पृथ्वी के कण-कण को

अपनी दूधिया रौशनी से नहलाने वाले चाँद

कभी मेरे हृदय के आंगन में भी उतरो न

इतना गहरा तिमिर लिए बैठी हूँ

प्यार करने वाले ह्रदय के द्वार आते हैं

प्यार और भरोसे का दिया जलाते हैं

पर हार जाता है वो नन्हा दिया

इस काले असुर से लड़ते लड़ते...

बुझा दिया, बुझा मन... लेकर सब लौट जाते हैं


अपनी किरणों से अमृत झरने वाले चाँद...

मेरे अन्तस के गरल पर भी असर दिखाओ न

जो गला रहा है मुझे ही धीरे धीरे

जितनी प्यार की मिठास मुझे मिलती है

मेरे ही अंदर का विष उसे खारा बना देता है


जैसे सोलह कलाओं वाले तुम हो

मुझे भी सोलह सिंगार करने हैं,,,,

अपने प्रियतम के लिए 🙂

इस अंधकार और विष से मुक्ति दिला दो न

वो आयें मेरे मन के द्वार

मैं स्वागत करूँ उनका...विश्वास की चमक से

और मन भर दूँ उनका...प्रेम के अमृत से


सुनो,,,

आज खीर के साथ अपना मन भी टांग आउंगी अलगनी पे

अपनी अमृत वर्षा इस पर कर देना

उनको सदा-सदा के लिए तुम मेरा करके

ओ पूरे चाँद...

आज मेरे इस व्रत को भी तुम,,#पूर्ण कर देना 🙏

#मानवी

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