अनकहे ख्याल
हाँ मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिखती
आस पास हो रही
दुखद घटनाओं के बारे में,
शब्द ही नहीं मिलते...
सैनिकों की शहादत पर
मन से उन्हें सैल्यूट करती हूँ
उनके परिवार के दुख को समझकर
अपनो के लिए चिंतित होती हूँ
जो भी दूर हैं अपने परिवार से
अपने काम के लिए...
हाँ मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिखती
किसी नेता-अभिनेता के निधन पर
उनके किये अच्छे कामों को याद करती हूँ
सोचती हूँ कि कभी तो मेरा कोई अपना
इतने अच्छे काम कर पाए
कि युगों युगों तक सबके मानस पटल पर
उसका नाम गर्व के साथ अंकित रहे
हाँ मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिखती...
किसी के साथ जबरदस्ती करके ज़िंदा जला देने पर
सोच कर भी दहशत हो जाती है
शब्द ढूंढे से नहीं मिलते
डर बैठ जाता है अपनी बच्चियों के लिए
सब शाम तक सुरक्षित घर वापिस आ जायें
सबकी बातें पढ़-सुनकर
बच्चियों को दुनियादारी समझाती हूँ
हाँ मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिखती...
किसी को हक़/न्याय दिलाने के लिए
आवाज बुलंद नहीं करती...
खुद के हक़ के लिए कभी आवाज़ नहीं उठा पायी,,,
बस प्रार्थना कर लेती हूँ
कभी किसी के साथ कुछ बुरा न हो
हाँ,,,,,मैं सोशल मीडिया पर नहीं लिखती
क्योंकि अपना दुख दिखाने के लिए
कभी शब्द नहीं रहे मेरे पास...
#मानवी
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