इन दिनों

 न खुश न उदास

न तृप्ति न प्यास

अज़ीब सी कुछ रिक्तता है इन दिनों

ख्यालों का अंधड़

पलकों पे कंकड़ 

यादों के तिनके मन बीनता है इन दिनो


न सर पे हाथ

न टिकने को कांधा

न माथा कोई चूमता है इन दिनों

भागता जीवन

ठहरा सा मन

चकरघिन्नी सा बदन बस घूमता है इन दिनों


सर्द ख्वाहिशें

बैचैन रिहाइशें

बाहों में बंधने को मन तरसता है इन दिनों

प्रियतम स्वाति

नैना चातक

सुना है,,, प्रेम बरसता है इन दिनों ❤️

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