शादी का बंधन

 कभी देखा है अपने घर की स्त्रियों के चेहरों को ध्यान से


काम में जुटी हुई, पसीना बहाती,

पुरुषों की फटकार सुनती, बच्चो को लाड़ लड़ाती

हर एक कि पसंद नापसंद का ध्यान रखने वाली


क्या कभी किसी को ध्यान आया उनकी पसंद का

उनको खाने में क्या पसंद है

उनको भी घूमना फिरना पसंद है

उनकी तबियत भी नासाज़ हो सकती है

कभी उन्होंने भी किसी को मन ही मन पसंद किया होगा

किसी के साथ जीवन बिताने के सपने देखे होंगे

कुचल दिया होगा मन में ही उन अनगिनत इच्छाओं को

माँ-पापा की इज़्ज़त की खातिर....😔


सोच कर देखिये, अपने आस पास देखकर सोचिए

क्या हर बार परिवार के फैसले सही होते हैं

क्या हमेशा अरेंज मैरिज वाली लड़कियाँ खुश रह पाती हैं


ससुराल वालों के तानों के बोझ से दबी

मायके वालों से ये भी नहीं कह पाती कि

मुझे किस जगह लाकर बांध दिया है


चुपचाप जहर का घूँट पीती पीती

पल पल हज़ारों मौत मरती

बिना किसी को कोई दोष दिए

अपनी पसंद नापसंद के साथ

ज़रा से प्यार की उम्मीद दिल में लिए

चली जाती हैं एक दिन हमेशा के लिए


आज किसी ने एक आवाज़ क्या उठायी

सारे समाज की नज़रों में गिर गयी वो


कन्यादान के बाद वैसे भी पिता का हक़ कहाँ मानते हो

वो जी रही हो या मर रही हो

बस दिलासा देकर आ जाते हो कि समझौता करके चलो

शादी न होने तक वो एक बेटी थी,

समझा सकते थे, बांध कर रख सकते थे

शादी करके किसी की पत्नी हो गयी

अब हक़ कहाँ रहा उसके जीवन पर 😐


अरेंज मैरिज करो तो ससुराल वाले जला कर मार दें

लव मैरिज करो तो मायके वाले गोली मार दें....

स्त्री मुक्ति की बातें करने वालों...कभी सोचा है.....😢

#मानवी

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