विवशता
सबका दुख दर्द सुना
दिलासा दिया..
हौंसला बंधाया..
अपनेपन की हर रस्म निभाई हमने
- अरे ज़रा अभी बिजी हूँ
- बस थोड़ी देर में कॉल करता/करती हूँ
- तुम गलत हो, खुद को थोड़ा सुधारो
दास्तां जब कभी अपनी सुनाई हमने...
सिर पर बाम लगाया
रुमाल बाँधा..
और सो गये...
किसी हथेली के सुकून भरे दबाब की चाहत न जताई हमने
बाथरूम को लॉक किया
मुँह में दुपट्टा ठूंसा..
बेआवाज जी भर रो लिये...
दुनिया को तो बस,,,,मुस्कुराहट ही दिखाई हमने 😊
हिकारतो के अनगिन वार झेलकर
रोक टोक की बेड़ी पहनी
खुले आसमान को तरसे
अपनी ज़िन्दगी जब भी अपनी तरह चलाई हमने
ज़माने की सुर लय ताल पर
जी भर नाचे..
जश्न मनाया...
खुद को खुद के मरने की, जमकर दी बधाई हमने
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