अवसाद

 खैरियत पूछो,,, कभी तो कैफियत पूछो


खैरियत पूछने वाला कोई है ही नहीं

या कभी किसी को अपना बनाया ही नहीं

किसी को बनाया तो वो साथ निभा पाया ही नहीं


हज़ारों बहाने

लाखो दलीलें

सैकड़ो परिस्थितियां


जो अकेला है,,, वो अकेला ही है !!

- कभी कुछ मन का हो गया...तो खुश

- मन का नहीं हुआ.... तो उदास

ये छोटी छोटी खुशियां-उदासियाँ

ये खुराक हैं उसके अकेलेपन की


लगातार खुशी मिल जाये, तब खोने से डरते हैं

लगातार दुख मिल जाये, तब पागल से फिरते हैं

...लेकिन कभी किसी से कुछ बांट नहीं पाते

...क्योंकि किसी पर भरोसा ही नहीं कर पाते,


ये अवसाद में डूबे... 

अकेले खड़े ठूँठ से दरख़्त

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