मुस्कुराती सुबह

 मेन रोड पर बने हुए आलीशान मकान

रात दिन ट्रैफिक का धुआँ, कानफोड़ू शोर

लोग ताज़ी हवा लेने सवेरे सवेरे पार्क के चक्कर काटते दिखाई देते हैं, हर कोई अपनी धुन में मस्त, कोई एक्सरसाइज करता हुआ, कोई जॉगिंग, कोई योगा तो कोई वॉकिंग.....

अगर आप भी मेन रोड पर रहते हैं तो सवेरे सवेरे कभी शहर की #गलियों से होते हुए जाइये, एक अलग ही दुनिया बसी होती है वहाँ पर, वहाँ रौनक ही सुबह सुबह देखने को मिलेगी।

हर दरवाज़ा खुला मिलेगा, 

घरों की धुलाई होती हुई, महसूस होता है मानो यहाँ बारिश हुई है, भीगी सी गलियाँ, आगे चलकर गली का छोटा सा मन्दिर, सवेरे से ही घण्टियों की आवाज़ों से गूँजता, त्योहार पर हर आते-जाते को रोककर प्रेम से प्रसाद देना, एक तरफ गीले बालों को दुपट्टे से लपेटे कोई पेड़ की पूजा कर कथा कहती हुई, कोई सुनने वाला नही पास में, लेकिन उसकी तेज़ आवाज़ बताती है कि उसे भरोसा है कि भगवान सुनते हैं। बच्चे स्कूल जाने से पहले भागदौड़ मचाते हुए, एक तरफ गली के पुरुष पाजामे-बनियान में किसी बात पर ठठाकर हँसते हुए,,,, क्योंकि यही समय है उनका बतियाने का। फिर सब काम पर निकल जाते हैं

दोपहर भर ये गलियाँ सुनसान रहती हैं, 

जैसे किसी की हँसी, किसी के लौट आने की राह तकती सी

शाम को फिर गुलज़ार होने की आस में, इन छोटी छोटी गलियों की ज़िंदगी किसी चलती फिरती फ़िल्म की कहानी से कम नहीं होती

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