नया साल

 2020 के मौसम सारे खुल चुके, 2021 अभी कोहरे में है

आशायें भरी हैं सभी के मन में, निराशा फिर भी थोड़े में है


जो थे कभी हर मर्ज की दवा, साथ छोड़ गए जो बन के हवा

बूंद होकर अभी इन आँखों के कोरे में है

निराशा फिर भी थोड़े में है


नए साल में नए रिश्ते जुड़ेंगे, जिंदगी भर मिल के साथ चलेंगे

उम्मीदें सजी लाल जोड़े में हैं....

निराशा फिर भी.....

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