कोई....
बहुत थक गई हूँ
ये दिन भर की भागम भाग
दिमाग की मशक्कतें
दिल पर भी असर डालने लगी हैं
कोई होता जो मेरी थकान को समझ पाता
समझ पाता.... कि मुझे क्या चाहिए
जिसके प्यार भरे स्पर्श से भूल जाती सारी चिंतायें
एक हमसफ़र....
जिसके साथ निकल जाती
ख्वाबों के सफर पर.....
लेकिन....
जिनके पास हमसफ़र होते हैं
क्या वो सब एक दूसरे को समझ पाते हैं
एक दूसरे की जरूरतें
एक दूसरे की आदतें
शायद नही....
तो मेरा #अकेलापन ही क्या बुरा है
कम से कम किसी से शिकायत तो नहीं
कम से कम किसी से उम्मीद तो नहीं
किसी के साथ का ख्वाब ही सही....
तकलीफ तो नहीं देता
बजाय इसके कि......
कोई साथ होकर भी साथ नहीं
हाँ,,,,मैं अकेली ही खुश हूँ
ये दिन भर की भागम भाग
दिमाग की मशक्कतें
दिल पर भी असर डालने लगी हैं
कोई होता जो मेरी थकान को समझ पाता
समझ पाता.... कि मुझे क्या चाहिए
जिसके प्यार भरे स्पर्श से भूल जाती सारी चिंतायें
एक हमसफ़र....
जिसके साथ निकल जाती
ख्वाबों के सफर पर.....
लेकिन....
जिनके पास हमसफ़र होते हैं
क्या वो सब एक दूसरे को समझ पाते हैं
एक दूसरे की जरूरतें
एक दूसरे की आदतें
शायद नही....
तो मेरा #अकेलापन ही क्या बुरा है
कम से कम किसी से शिकायत तो नहीं
कम से कम किसी से उम्मीद तो नहीं
किसी के साथ का ख्वाब ही सही....
तकलीफ तो नहीं देता
बजाय इसके कि......
कोई साथ होकर भी साथ नहीं
हाँ,,,,मैं अकेली ही खुश हूँ
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